कौन कहता है….. दर्द के लिये सिर्फ मोहब्बत जिम्मेदार होती है
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कमबख्त “दोस्ती” भी बहुत दर्द देती है, अगर दिल से हो जाये
⚜⚜⚜⚜
“क्यूँ मुश्किलों में साथ देते हैं “दोस्त”
“क्यूँ गम को बाँट लेते हैं “दोस्त”
“न रिश्ता खून का न रिवाज से बंधा है !
“फिर भी ज़िन्दगी भर साथ देते हैं “दोस्त ”
*~ I Love my Friends ~*
तन्हाई महसूस हो तो हमें याद करना….,
खुशियाँ बाटने के लियें दोस्त हजारो रखना,
जब ग़म बांटना हो तो हमें याद करना …..
न जाने कैसे हम आपकी दोस्ती के काबिल हुए,
न भूलेंगे हम उस हसीं पल को,
जब आप हमारी छोटी सी ज़िन्दगी में शामिल हुए.
वो सब दोस्त अब थकने लगे है
किसीका पेट निकल आया है
किसीके बाल पकने लगे है
सब पर भारी ज़िम्मेदारी है
सबको छोटी मोटी कोई बीमारी है
दिनभर जो भागते दौड़ते थे
वो अब चलते चलते भी रुकने लगे है
उफ़ क्या क़यामत हैं
सब दोस्त थकने लगे है
किसी को लोन की फ़िक्र है
कहीं हेल्थ टेस्ट का ज़िक्र है
फुर्सत की सब को कमी है
आँखों में अजीब सी नमीं है
कल जो प्यार के ख़त लिखते थे
आज बीमे के फार्म भरने में लगे है
उफ़ क्या क़यामत हैं
सब दोस्त थकने लगे है
देख कर पुरानी तस्वीरें
आज जी भर आता है
क्या अजीब शै है ये वक़्त भी
किस तरहा ये गुज़र जाता है
कल का जवान दोस्त मेरा
आज अधेड़ नज़र आता है
कल के ख़्वाब सजाते थे जो कभी
आज गुज़रे दिनों में खोने लगे है
उफ़ क्या क़यामत हैं
सब दोस्त थकने लगे है
👍👍
फिर भी इतना प्रेम नहीं होता,
–
( मुर्गा, सिगरेट और दारु)
मिल गए तो कुछ घंटो में ही अटूट प्रेम हो जाता है…!!!
दोस्त इकट्ठा किये है हमने
आज पुराने भी चल ही रहे है
*”मजाक था यार”*
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👉एक फीलिंग छुपी होती है
जब कोई
कहता है
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*”Its ok”*
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कहता है
*”मुझे अकेला छोङ दो”*
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है जब कोई कहता है
*”पता नही”*
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👉एक बातों का समंदर छुपा है जब कोई
*खामोश रहता है*
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सर्जरी की यूनिट के बाहर
लिखा था कि
*अगर दिल खोल लेते अपने यारों के साथ*
*तो आज नही खोलना पङता औजारों के साथ..!!*
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बादशाह का बहुत प्रेम उस फकीर पर हो गया।
प्रेम
भी इतना कि बादशाह रात को भी उसे अपने
कमरे में सुलाता।
कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही
करते।
एक दिन दोनों शिकार खेलने गए और रास्ता भटक गए।
भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक
ही फल लगा था।
बादशाह ने घोड़े पर चढ़कर फल को
अपने हाथ से तोड़ा। बादशाह ने फल के छह टुकड़े
किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा
फकीर को दिया।
फकीर ने टुकड़ा खाया और बोला,
‘बहुत स्वादिष्ट! ऎसा फल कभी नहीं
खाया।
एक टुकड़ा और दे दें।
दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल गया।
फकीर ने एक टुकड़ा और बादशाह से मांग
लिया। इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग
कर खा लिए।
जब फकीर ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो
बादशाह ने कहा,
‘यह सीमा से बाहर है। आखिर मैं
भी तो भूखा हूं।
मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं
करते।’ और सम्राट ने फल का टुकड़ा मुंह में रख
लिया।
मुंह में रखते ही राजा ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह कड़वा था।
राजा बोला,
‘तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?
‘
उस फकीर का उत्तर था,
‘जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?
सब टुकड़े इसलिए
लेता गया ताकि आपको पता न चले।
दोस्तों जँहा मित्रता हो वँहा संदेह न हो, आओ
कुछ ऐसे रिश्ते रचे…
कुछ हमसे सीखें , कुछ हमे
सिखाएं.
👍👍👍👍
सच्चा दोस्त वही है जो आपका काम करने के लिए तुरंत हां कर दे
बस इतनी👌� ही माँग 🙏🏻हे ऊपर ☝�वाले से
कि, मेरे 👉कमीने� दोस्त 👰🏻 हमेशा 😘मेरे पास👫 चाहिये😉.















